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Bank Frauds

आजकल ऑनलाइन फ्रॉड खूब हो रहा है। यह कई तरह से होता है। इसमें कई बार आपके बैंक में जमा पैसे भी गायब हो जाते हैं। लेकिन अगर आपके पास सही जानकारी है तो आप न सिर्फ ऐसे नुकसान से बच सकते हैं, बल्कि अगर नुकसान हो गया है तो उस पैसे को वापस भी पा सकते हैं। यह वित्तीय फ्रॉड आमतौर पर आपकी कुछ निजी जानकारियां हासिल करके किया जाता है। इसमें सबसे पहले लोगों का फोन नंबर, बैंक का डिटेल पता लगाया जाता है। इसके बाद आपके बैंक अकाउंट से या क्रेडिट कार्ड तक पहुंच बना कर फ्रॉड किया जाता है। यह फ्रॉड अक्सर लोगों का पूरा बैंक अकाउंट खाली कर देता है।

लगातार बढ़ रहे फ्रॉड के मामले

आरबीआई की की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा धोखाधड़ी की राशि में 73.8 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 में बैंकों में 71,542.93 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई। यह 2017-18 में 41,167.04 रुपये की थी।

सबसे पहले जानें कैसे बचें फ्रॉड से

इसका सबसे अच्छा तरीका है कि बैंकों और आरबीआई के चेतावनी का पूरा ध्यान रखें। कभी भी अपनी निजी जानकारियां किसी को न दें। बैंक और आरबीआई इस तरह की सूचना अक्सर एसएमएस या मेल पर देता रहता है। देश में साफ साफ नियम है कि बैंककर्मी आपसे आपके पासवर्ड या ओटीपी कभी भी नहीं मांग सकते हैं। ऐसे में अगर आपसे कोई ऐसी जानकारी मांग रहा है, तो समझ जाएं कि वह कोई फ्रॉड है। इसके अलावा ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के समय, रिटेल आउट लेट या पेट्रोल पंप पर अपने कार्ड का इस्तेमाल करते समय भी सतर्क रहें। ऑनलाइन खरीदारी, बैंकिंग वेबसाइट का उपयोग हमेशा अपने लैपटॉप या मोबाइल से सही करें। ऐसे काम साइबर कैफे या फ्री के वाई-फाई से करने से बचें। यहां पर आपकी निजी जानकारियां चोरी हो सकती हैं, जिनका आपको बाद में नुकसान हो सकता है। इन कदमों से आप फ्रॉड से सुरक्षित रह सकते हैं।

और कैसे बढ़ाएं सुरक्षा

इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है कि अपने पासवर्ड को हमेशा बदलते रहें। लेकिन पासवर्ड कभी ऐसे न बनाएं जिसका लोग अंदाजा लगा सकें। इनको हमेशा ट्रिकी रखें। इसमें सभी तरह के अक्षर और स्पेशल करेक्टर को शामिल करें। इसके अलावा अपने बैंक अकाउंट को मोबाइल फोन से जोड़ कर भी रखें। वहीं अपने बैंक अकाउंट में एसएमएस अलर्ट सर्विस भी एक्टिव रखें। ऐसा होने से जैसे ही आपके बैंक अकाउंट में कोई ट्रांजेक्शन होगा, आपको तुरंत पता चल जाएगा। अगर यह ट्रांजेक्शन गलत है तो आप इसे रोकने की पहल भी कर सकते हैं।

फ्रॉड होने के लिए कौन जिम्मेदार

बैंक अकाउंट के अलावा डेबिट और क्रेडिट कार्ड की सुरक्षा ग्राहक की बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन उतनी ही जिम्मेदारी बैंक की भी है। गलत ट्रांजैक्शन से संबंधित शिकायत के लिए आरबीआई ने गाइडलाइंस जारी की हुई है। इसके अनुसार यदि बैंक की ओर से किसी तरह की तकनीकी, लापरवाही या ग्राहक की निजी जानकारी लीक होती है, तो इसके लिए ग्राहक को जिम्मेदार नहीं माना जाएगा। अगर थर्ड पार्टी के तहत अकाउंट होल्डर के साथ फ्रॉड होता है, तो न तो बैंक और न ही खाताधारक को जिम्मेदार माना जाएगा। यहां पर थर्ड पार्टी का मतलब वेबसाइट, ऑनलाइन वॉलेट के जरिए पेमेंट आदि हैं। अगर ऑनलाइन पेमेंट दो बार हो गया, तो ग्राहक को 3 दिन के भीतर बैंक को सूचित करना चाहिए।

कब होंगे आप जिम्मेदार

अगर इन मानकों पर ध्यान दिया जाए तो बैंक और थर्ड पार्टी की जिम्मेदारी तय है। लेकिन अगर बैंक ग्राहक अपनी गलती से फ्रॉड का शिकार होता है, या किसी अन्य बात से नुकसान उठाता है, तो बैंक जिम्मेदार नहीं होता है। ऐसे मामले में होने वाले नुकसान को ग्राहक को खुद ही उठाना पड़ता है। ऐसे में हमेशा बैंक अकाउंट से संबंधित पर्सनल डाटा कभी भी किसी को न बताएं। हालांकि अगर बैंक अकाउंट में किसी भी तरह का फ्रॉड दिख रह है, तो इस फ्रॉड की शिकायत बैंक से करें। ऐसी स्थिति में नुकसान की भरपाई बैंक करेगा.

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